देव दासी भाग 549

खाने का समय हो जाता है कामिनी गीता के साथ घूमने चलती है वहां पर बहुत बड़ा बागीचा होता है बहुत सारे फूल खिले हुए होते हैं

कामिनी गीता से पूछती है कि ये महिलाएँ कौन है जो मुझे इस तरह देखती है

गीता अपनी आंखें नीची करके कहती हैं भाभी आप इन बातों मे ना पड़े तो अच्छा होगा

वो सब चाची देख लेंगी

ये सब अनाथ लड़कियां हैं जिन्हें काम पर रखा गया था और ये सब आज भी हवेली मे काम करती है और यही रहती है

तभी शांता वहां आ जाती है और कहती है कि अब चलो जल्दी से खाना खाओ घर भी चलना है

कामिनी खाना खाने से मना कर देती है उसका मन बहुत द्रवित हो चुका था

उसे बहुत दुख था वो एक नम्र हृदय वाली लड़की थी उसका दिल नेक था और वो सबका दुख दर्द समझती थी

शायद वो कभी कठोर ना बन पाए

ठाकुर घराने की बेटी और फिर ठाकुर वीर सिंह की पत्नी होने का गर्व तो था परंतु एक नारी का हृदय सर्वप्रथम था क्रमशः

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