खाने का समय हो जाता है कामिनी गीता के साथ घूमने चलती है वहां पर बहुत बड़ा बागीचा होता है बहुत सारे फूल खिले हुए होते हैं
कामिनी गीता से पूछती है कि ये महिलाएँ कौन है जो मुझे इस तरह देखती है
गीता अपनी आंखें नीची करके कहती हैं भाभी आप इन बातों मे ना पड़े तो अच्छा होगा
वो सब चाची देख लेंगी
ये सब अनाथ लड़कियां हैं जिन्हें काम पर रखा गया था और ये सब आज भी हवेली मे काम करती है और यही रहती है
तभी शांता वहां आ जाती है और कहती है कि अब चलो जल्दी से खाना खाओ घर भी चलना है
कामिनी खाना खाने से मना कर देती है उसका मन बहुत द्रवित हो चुका था
उसे बहुत दुख था वो एक नम्र हृदय वाली लड़की थी उसका दिल नेक था और वो सबका दुख दर्द समझती थी
शायद वो कभी कठोर ना बन पाए
ठाकुर घराने की बेटी और फिर ठाकुर वीर सिंह की पत्नी होने का गर्व तो था परंतु एक नारी का हृदय सर्वप्रथम था क्रमशः

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