शादी का असली मतलब 280

रिकी जा चुकी थी प्रमोद और रूपा रिकी को एयरपोर्ट छोड़ने गए थे दोनों वापस आ गए थे

सुनीता उन दोनों को देखकर कहने लगी कि अब तो सारे बंधन चले गए बाधा भी चली गई किसी की मैं तो सोने जाती हू बहुत काम किया था थक गई हू

प्रमोद भी अपने कमरे मे सोने चले जाते हैं प्रीति अभी ऑफिस से नहीं आई थी

रघु अपने कमरे मे बोर हो रहे थे और वो बरामदे मे खड़े हुए थे

रूपा भी नहीं सो रहीं थीं उसे बार बार रिकी की याद आ रहीं थीं

अब उसे अकेलापन लग रहा था

तभी वो बाहर आकर थोड़ी देर टहल लेना चाहती थी लेकिन उसकी पढ़ाई बाकी थी 15 दिन बाद उसका इंटरव्यू था और उसे अपने इंटरव्यू की तैयारियां भी करनी थी

और वो रात मे टेबल लैम्प जलाकर पढ़ने ही जा रहीं थीं तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी

क्रमशः

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें