गीता कामिनी को घुमाती है बागीचा दिखाती है कहती हैं कि ये बागीचा वीर भैया का प्रिय है परंतु यहां सिर्फ वीर भैया अपना काम काज करते हैं
और भी बहुत सारे बगीचे है जो भैया को बहुत पसंद हैं तभी शांता आ जाती है और कहती है कि अब रात होने वाली है तुम्हारे भैया भी आए हुए हैं कल तुम्हें ले जाएंगे उनके रहने और खाने का प्रबंध वीर सिंह ने कर दिया है और अभी सब साथ में आनंद मना रहे हैं चलो अब तुम घर वर्ना वीर नाराज हो जाएंगे उनकी गुस्सा से अभी तुम परिचित नहीं हो
और शांता कामिनी को अपने साथ ले जाती है कामिनी खाना भी नहीं खाती उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा उसे ऐसा लगता है कि माँ कुछ छिपा रहीं हैं मुझसे क्रमशः

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