अर्जुन नीलू को देखते ही रहते हैं कि नीलू और भी सुन्दर हो चुकी थी जयश्री घुटनों के बल खिसकने लगी थी वो बार बार अर्जुन को देख रहीं थीं लेकिन उनके पास नहीं आ रही थी
अर्जुन कह्ते है कि मैं तुम्हें लेने आया हू नीलू सोंच रहीं थीं कि जरूर कोई बात होगी और वो जान भी जाती है कि ये एक स्वार्थ व्यक्ति है
ये ऐसे नहीं आया है जरूर इसका कोई काम होगा
नीलू कहती हैं कि मुझे क्यों लेने आए हों तुम
मुझे तो घर से निकाल दिया था त्याग दिया था तुमनें अब क्या हुआ जो लेने आए हों साफ़ साफ कहो क्या बात है
जयश्री नीलू की गोद मे आ गई थी नीलू ये सोंच कर बहुत घबरा रहीं थीं कि फिर इनके साथ जाना पड़ेगा क्रमशः

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