किसी भी चीज को पाने की चाहत

कभी कभी पूरी होती है परंतु कभी कभी नहीं पूरी होती है

पूरी होकर भी दूर चली जाती है

पास होकर भी दिल से दूर हो जाती है

चाहत एक व्यथा है

इस गहराई को जो कोई समझता है वही असली आनंद पा सकता है

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें