
सब कुछ होते हुए भी जब हमे अशांति होती है और हमे नींद नहीं आती जबकि अच्छा बिस्तर, अच्छा खाना और भी बहुत कुछ अपने पास होता है जो हम सोंचते है कि सब हमारी मेहनत का फल है
लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि एक समय हमारा भी बुरा था हम मोहताज थे एक एक चीज को
तब किसी एक ने हमारा हाथ पकड़ कर हमे सहारा दिया था हमारा सहयोग किया था भले ही थोड़ा ही सही
क्यों लोग अपने आलीशान बंगले मे अनिद्रा का शिकार होकर रात मे बरामदे मे या किसी कमरे में अपनी रात जाग जाग कर गुजारते है
उनको ये बात समझ मे नहीं आती की ऐसा क्यों होता है उनके साथ अक्सर
उनके साथ अक्सर इसलिए होता है कि वे लोग अपनों से दूर जा चुके हैं उनके अभिमान ने उनकी बुद्धि हर ली है वे उनको भूल गए हैं जिन्होंने कभी तकलीफों मे उनकी मदद की थी
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