थोड़े से सुख के लिए कुछ लोग अपने चरित्र का पतन खुद ही कर देते हैं

कहीं कहीं पर देखा गया है कि कुछ लोग वासना के वशीभूत होकर कुछ ऐसे कार्य कर डालते हैं जिनके परिणाम को वे खुद ही नहीं समझ पाते और भावनाओ के आवेश में आकर उस कार्य को अंजाम दे देते हैं

बाद मे जब उम्र ढल जाती है तब वे पछताते है

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