
कामिनी वीर सिंह मे बिल्कुल खो जाती हैं सुबह होती है और कामिनी के भैया कामिनी को ले जाने के लिए आए हुए है और कामिनी अपने भाइयों के साथ जाने के लिए उत्सुक हैं आज पहली बार मायके जाने की खुशी दुगुनी हो चुकी है सास दौड़ रहीं है कामिनी की तयारी कर रहीं हैं वीर सिंह उदास बैठे हुए हैं उन्हें कामिनी का जाना अच्छा नहीं लगता है कामिनी उनकी आँखों मे देखकर इनके मन की बात को जान चुकी है
लेकिन उसके भैया लोग आए है वे भी बहुत खुश हैं कामिनी को देखकर
अपनी बहन का सुख देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है वे शांता से कहती है माता जी हम सब बहुत भाग्यशाली है कि आप जैसे लोगों हमे मिले मेरी एक ही बहन है मुझे लगता है कि मेरी बहन सुखी रहेगी
क्रमशः
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