देव दासी भाग 557

कामिनी अपने घर आती है घर में उसका बहुत ही सम्मान और प्यार उसके मन को और भी प्रफुल्लित  करता है

दूसरे ही दिन वीर सिंह का एक पत्र आता है जिसका कामिनी को इंतजार था और कामिनी झट से पत्र अपनी भाभी से छीन लेना चाहती हैं पर भाभी चंचल होती है कहती हैं कि पहले खूब परेशान करुँगी तब दूंगी अब कामिनी भाभी के पीछे पीछे दौड़ती है भाभी और कामिनी में आज अच्छा खेल हो रहा था कामिनी कहती हैं कि भाभी दे दो मेरा पत्र जो मांगों मैं दूंगी

भाभी कहती हैं कि तुमने भी अपने भैया के पत्र देने मे ऐसा ही किया था आज तो बदला लुंगी मैं

तभी कामिनी रोने लगती है अब तो भाभी कामिनी के पास आ जाती है और कहती है कि पगली ये आंसू तेरे ऊपर अच्छे नहीं लगते ले अच्छा

क्रमश

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