देव दासी भाग 558

भाभी कामिनी को वीर सिंह का पत्र वापस कर देती है वीर सिंह पत्र मे बहुत प्यारी प्यारी और बहुत लुभावनी बातें लिखते हैं उनके पत्रों से कामिनी को लगा कि वीर सिंह उसके लिए पागल हो गए कामिनी को लगता है कि वीर सिंह के बारे में कोई कुछ भी कहेगा वो कभी विश्वास नहीं करेगी

वो सारी महिलाये झूठी है जो वीर सिंह के बारे में कुछ अजीबोगरीब बातें कर रहीं थीं

वीर सिंह तो उसके पति है जो उसे जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं

कामिनी भी वीर सिंह को पत्र लिखकर देती है और पत्रों का सिलसिला चल जाता है

अब तो एक पत्र पिता जी के पास आता है उसमे लिखा है कि वीर सिंह कामिनी को लेने आ रहे हैं

अब माता जी नाराज होती है कहती हैं कि अभी 15 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं हमारी बिटिया को मायके मे और लेने आ गए

पत्र मे उत्तर दे दो की हम अभी नहीं भेजेंगे कामिनी को हमारी एक ही तो बेटी है अभी तो हमारा जी नहीं भरा है और ना अभी उसका जी भरा ये कौन सी बात हुई क्रमशः

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