
अब दो दिन के बाद वीर सिंह और उनके घर वाले कामिनी को लेने आने वाले थे माँ भेजने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी लेकिन कामिनी के पिता समझाते हैं कि अब बेटी भी किसी के घर की बहू हो गई उसका अपना घर ससुराल होता है उसे जाना ही पड़ेगा और फिर अपनी बेटी तो रानी महारानी है
अपने खानदान की अकेली बहू सभी लोगों की लाडली
उसे मत रोको उसे जाने दो कामिनी का मन भी अभी ससुराल जाने का नहीं था लेकिन वह कुछ भी नहीं बोल सकती थी अब तो वह एक कठपुतली बन चुकी थी उसकी डोर तो अब वीर सिंह के हाथों मे थी
क्रमशः
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