किसी ने सच ही कहा हैकि न कर घमंड अपने समय का क्योंकिसमय कैसा भी हो बदलता अवश्य हैं

हमे मालूम नहीं है शायद की ये बहारें कब चली जाती है पता भी नहीं चलता

ये हवाओं का रुख जो आज बहुत शीतल शीतल महसूस हो रहा है कब गर्म हवा का झोंका हमे पीड़ा देने लगे कुछ एहसास भी नहीं होता

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