
अब कामिनी के जाने का समय भी आ चुका था वीर सिंह के घर वाले कामिनी को लेने भी आ चुके थे कामिनी अपने घर मे ही पराई हो चुकी थी लेकिन अब तो उसका घर ससुराल ही था
कामिनी की विदाई की गाड़ी आ चुकी थी वीर सिंह की गाड़ी जो वीर सिंह को बहुत ही प्रिय थी
कामिनी उस गाड़ी में बैठ चुकी थी कामिनी की माँ का रोना नहीं बंद हो रहा था आखिर उनकी एक ही बेटी थी कामिनी वह भी लाडली बेटी आज अपने सीने पर पत्थर रखकर उसे विदा करना होगा
अपनी ही बेटी को जी भरकर वो रख भी ना सकीं
उधर कामिनी भी खूब रो रहीं थीं कामिनी की भाभियों का भी रोना बंद नहीं हो रहा था कामिनी सबको प्यारी थी
भाई खड़े थे कामिनी की सहेलियाँ भी कामिनी की विदाई मे आई थीं
क्रमशः
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