
मैंने शादी से पहले कभी सब्जी नहीं खरीदी थी, हमेशा मम्मी या पापा ही खरीदते थे। शादी के बाद कुछ समय तक सास ससुर साथ में रहे फिर वापिस चले गए। उसके बाद मैंने अपनी गृहस्थी संभाली और चल पड़ी इक दिन पति के साथ सब्जियां खरीदने। पतिदेव कुछ दूर बाईक लेकर खड़े हो गए और मैं सब्जी की दुकान पर पहुंच गई। सब सब्जियां ले ली फिर आई अदरक की बारी, दुकानदार ने पूछा ,”कितना दूं।”
मुझे कुछ समझ नहीं आया,मैंने कहा,”आधा किलो दे दो!”
फिर उसने मुझसे दो बार और पूछा,”आधा किलो”…… मैंने कहा,”हां।”
और उसने आधा किलो तौल कर सारी सब्जियों के साथ मेरे थैले में डाल दिया।
मैं बहुत खुश थी कि आज पहली बार मैंने खुद सब्जी खरीदी है।
घर आकर देखा तो अदरक कुछ ज्यादा ही लग रहा था, मेरे पतिदेव ने पूछा,”कुछ अचार डालना है क्या अदरक का, आता है क्या अचार बनाना?”
अब क्या कहती मैं उनको, बोल दिया मैंने साफ़ साफ़ कि,”मुझे नहीं पता था कि आधा किलो अदरक इतना ज्यादा होता है, वरना मैं एक पाव ही लेती।”
और सच बताऊं तो मुझे ये चीज पता ही नहीं थी कि हम अदरक ग्राम में भी खरीद सकते हैं।
मुझे लगा हम एक पाव से कम कोई सब्जी खरीद ही नहीं सकते।
आज इस बात को करीब 10 साल हो गए हैं,आज भी अदरक देखकर मुझे वो किस्सा याद आता है।
खैर वक्त और जिम्मेदारी सब सिखा देती है। अब मुझे सब्जी खरीदनी अच्छे से आती है।
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