देव दासी भाग 571

आँखों मे आंसू भरे हुए और अपनी माँ को देखती हुई कामिनी अपने ससुराल चली जाती है

वह रोज की तरह अपनी ससुराल मे सास की बातें सुनती वीर सिंह आते और उसके साथ कुछ समय गुजारते और फिर चले जाते कोई राय मशविरा करने का भी कामिनी को कोई हक नहीं था

वीर सिंह अपनी माँ की सारी बाते मानने वाले पुत्र मे से एक थे

कामिनी अपनी बातों को याद करके अपने आंसुओ को पोंछ रहीं थीं कि गीता वहां से निकलती है और कहती है भाभी आज 22 साल पुरानी बातेँ याद करके रो रहीं हो क्या हुआ

कामिनी कहती हैं कि मैं जहां तक अपनी पुरानी बातेँ याद करती हूं तो मेरी आँखों से पानी गिरने लगता है ऐसा लगता है कि अभी कुछ ही दिनों की बात है

अच्छा गीता ये बताओं की वो महिला जो यहां आई थी वो कहा गई

गीता कहती हैं कि वो कहीं घूमने निकल गई होगी

बगीचे मे घूम रहीं होगी और कहां जाएगी

कामिनी कहती हैं कि अगर वो बाहर निकल गई तो सौम्य सिंह बहुत नाराज होंगे

गीता कहती हैं कि भाभी चारो तरफ पहरेदार है वो उसे जाने नहीं देंगे

क्रमशः

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