
दीपेन्द्र ने उस लड़की से पूछा कि तुम्हें मुझसे कोई कष्ट तो नहीं हुआ तुम शायद नहीं जानती कि मैं एक पागलपन का शिकार हू मुझे मानसिक रोग है, उन्माद का शिकार हू मैं
लड़की ने कहा कि तुमने तो मुझे बचाया है तुम मुझे कैसे नुकसान पहुंचा सकते हो
दीपेन्द्र ने कहा कि मैं उस समय होश मे नहीं रहता हू
मैं अपने बारे मे बाद में बताऊँगा पहले यहां से निकलते हैं चलो जल्दी से बाहर चलें
लड़की ने कहा कि चलो वहां पानी है झरना है वहां पर चलकर थोड़ा सा पानी पी लो फिर बाहर चलते हैं जल्दी चलो
और वो दीपेन्द्र को अपनी बाहों का सहारा देने लगती है
दीपेन्द्र उसका सहारा लेने से मना कर देता है उसे हाथ नहीं लगाता और कहता है कि मैं बिल्कुल ठीक हू तुम आगे आगे चलो मैं पीछे से हूं
और दोनों झरने के पास जाकर पानी पीते हैं दीपेन्द्र अपने सिर को पानी में भिगो लेता है और अपना मुह ढोता है
तभी दीपेन्द्र को लगता है कि शायद कोई आ रहा है दीपेन्द्र झरने के पास उस लड़की का हाथ पकड़ कर छिप जाता है क्रमशः
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