देव दासी भाग 572

कामिनी की आंखे भरी हुई थी उसकी बड़ी बड़ी आंखे लाल हो चुकी थी

उधर सुरुचि भी कुछ देर के लिए घूमने के लिए निकल चुकी थी वह अपनी बेटी मंजू लता के लिए बैचैन थी

लेकिन मंजू लता का कुछ पता नहीं चल रहा था ना जाने उसकी बेटी किस हाल मे होगी वह आगे की तरफ बढ़ती ही जा रहीं थीं

तभी उसे लगता है कि जगह कुछ जानी पहचानी लगती है उसे ऐसा लगता था कि शायद वो यहां आ चुकी है लेकिन कब आई थी वह बहुत परेशान हो चुकी थी अपने जीवन से अपनी पिछली जिंदगी को वह याद नहीं करना चाहती थी और वह बहुत दूर निकल आई थी वहां से कुछ दूर घंटो की अवाज आ रहीं थीं शायद वहां पर कोई मंदिर था

वो मंदिर जाकर अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करना चाहती थी और वो मंदिर की तरफ बढ़ रहीं थीं क्रमशः

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