पीड़ा एक कोने मे पडी थी सिहरते हुए वो पीड़ा कह रहीं मानो कि अरे कोई तो कुछ पानी के छींटे मार दो कोई तो राहत दो मुझे, लेकिन पीड़ाओं को ये भी पता नहीं था कि जिसको वो प्यार करती थी वही इसका कारण बनेगा पानी के कुछ छींटे तो क्या वो उसे देखने भी नहीं आएगा
पीड़ा एक कोने मे पडी थी सिहरते हुए वो पीड़ा कह रहीं मानो कि अरे कोई तो कुछ पानी के छींटे मार दो कोई तो राहत दो मुझे, लेकिन पीड़ाओं को ये भी पता नहीं था कि जिसको वो प्यार करती थी वही इसका कारण बनेगा पानी के कुछ छींटे तो क्या वो उसे देखने भी नहीं आएगा
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