मैंने देखा था एक पेंड के नीचे जो घना घना सा दिख रहा था शीतल हवा बिखेर रहा था पत्तियाँ झूम रही थी लेकिन मुझे क्या पता था मैं उस पेंड के नीचे कुछ देर राहत पाने के लिए गई तो देखा कि एक प्यारी सी लड़की पेंड की ओट मे अपने जिस्म की कीमत लगा रहीं हैं मुझे लगा कि ये पेंड कितना सहता है कितना झेलता है इसे भी दुख होता होगा जब ये लड़की खुद को बिना मर्जी के कुछ पैसों की खातिर वासना के भूखे भेड़िये के आगे खुद को परोसती होगी और मैंने अपने आंसू पोंछे और वहां से निकल आई और मैं सोंचने लगी कि काश मैं इसके लिए कुछ कर सकती
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