
मौसी अर्जुन को मना कर देती है कि वो नीलू को नहीं भेज सकती
अर्जुन कहते हैं कि अच्छा मौसी मुझे उन दोनों को देख लेने दो
मौसी कहती हैं कि उन मनहूस लोगों को देखकर तुम क्या करोगे
खाना खा कर जाना खाना बन चुका है
और मौसी कहती हैं तो अर्जुन कहते हैं कि मुझ जैसे पापी को खाना खिला कर क्या करोगी मौसी
मौसी कहती हैं कि मेहमान हमारे लिए भगवान के बराबर होता है
और एक थाली मे खाना लाकर देती है परंतु अर्जुन खाना नहीं खाते हैं और उठकर खड़े हो जाते हैं मौसी कहती हैं कि अन्न का तिरस्कार नहीं किया करते लेकिन अब जैसी तुम्हारी मर्जी क्रमशः
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