
उसने कहा कि मैं आपका अहसान कभी नहीं भूल सकती आप मेरे पिता से भी बढ़कर हैं
प्रकाश कहते है कि ठीक है मैं यही बैठता हू तुम मेरे लिए थोड़ी सी चाय बनाकर लाओ
आज चाय पीने का मन है रूपा कहती हैं कि अभी मैं चाय बनाकर लाती हू
और रूपा चाय बनाने जाती है
अंदर टेबल लैम्प जल रहा था हल्की रोशनी मे प्रकाश बैठे हुए थे
रूपा चाय लेकर वहां आ जाती है उधर प्रीति और सुनीता रघु से कहती है कि चलो हम लोग आज तुम्हें दिखाते हैं कि अंदर क्या चल रहा है
रघु कहता है कि क्या दिखाएगी मुझे आप
क्या अंदर चल रहा है
आप का दिमाग खराब हो गया है
इस उम्र मे ऐसी बाते शोभा नहीं देती मम्मी जी
रघु प्रीति से कहता है कि तुम भी मम्मी की बातों में आ गई क्रमशः
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