शादी का असली मतलब भाग 282

उसने कहा कि मैं आपका अहसान कभी नहीं भूल सकती आप मेरे पिता से भी बढ़कर हैं

प्रकाश कहते है कि ठीक है मैं यही बैठता हू तुम मेरे लिए थोड़ी सी चाय बनाकर लाओ

आज चाय पीने का मन है रूपा कहती हैं कि अभी मैं चाय बनाकर लाती हू

और रूपा चाय बनाने जाती है

अंदर टेबल लैम्प जल रहा था हल्की रोशनी मे प्रकाश बैठे हुए थे

रूपा चाय लेकर वहां आ जाती है उधर प्रीति और सुनीता रघु से कहती है कि चलो हम लोग आज तुम्हें दिखाते हैं कि अंदर क्या चल रहा है

रघु कहता है कि क्या दिखाएगी मुझे आप

क्या अंदर चल रहा है

आप का दिमाग खराब हो गया है

इस उम्र मे ऐसी बाते शोभा नहीं देती मम्मी जी

रघु प्रीति से कहता है कि तुम भी मम्मी की बातों में आ गई क्रमशः

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