
किसी को अपना मतलब निकल जाने के बाद आपकी सुध ही नहीं रहेगी इसलिए सावधानी से त्याग करें और आपके लिए भी कुछ सोंचे
माना कि जीवन ज्यादा दिनों का नहीं है लेकिन जितना भी मिला है उसे ही थोड़ा सा अपने लिए भी जी लिया करो
कोई नहीं सोचेगा आपके लिए
सब खिसक लेंगे
निकल लेंगे
काम आएगा तो अपनी आपकी समझदारी
जो आपने अपने आने वाले जीवन के लिए भी कुछ किया
कुछ सोंचा
माना कि समय किसी का नहीं है
लेकिन समय चलता उसी के साथ है जिसने इसे समझ लिया
माना कि कुछ गलती भावना के आवेश मे आकर लोगों से हो जाया करती हैं
लेकिन उन गलती से निकल पाना भी एक कला ही है
मैंने माना कि निःस्वार्थ सत्कर्म करना चाहिए
लेकिन सत्कर्म ये भी सिखाता है कि सत्कर्म भी सोंच समझ कर करने चाहिए
क्योंकि हम सत्कर्म पुण्य प्राप्त करने के लिए नहीं कर रहे
किसी की तकलीफ को समझ कर उसको थोड़ी सी राहत देने के लिए कर रहे हैं
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