देव दासी भाग 578

सुरुचि झरने मे स्नान करती है और शिव जी को एक मिट्टी के बर्तन से जल अर्पण करती है

तभी देखती है कि वही आंवले का पेंड कुछ दूर पर लगा है

वही तोता सुरुचि के कुछ दूर पर आकर बैठ जाता है सुरुचि उसे बहुत ध्यान से देखती है और कहती है कि तुम मुझे पहचान गए ना

तोता कहता है कि हा पहचान गए तुम वही हो ना जिसने मुझे पाला था और बाद मे मुझे छोडकर चली गई थी

सुरुचि कहती हैं कि इतने दिन तुमने यहा क्या किया

तोता कहता है कि यहीं मैं रहा और बड़ा हुआ तुम्हारा इंतजार करता रहा

तोता कहता है कि अब मैं तुम्हें ना जाने दूँगा

सुरुचि कहती हैं कि यहा पर दिए किसने जलाये

तोता कहता है कि एक लड़की आई थी उसने पूजा की थी वो तुम्हारे जैसी लगती थी

सुरुचि कहती हैं कि हट पागल

चल अब मुझे पूजा करने दे और गीले कपड़ों मे कुछ फूल चुन कर लाती है और शिव जी पर अर्पण करती है और शिव जी की आराधना करने लगती है

सुरुचि का मन एकदम शांत है

क्रमशः

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