क्या आजकल की संस्कृति यही है जो मैंने देखा

कैसे लोग है

गर्मी का समय था

मैं भी डाक्टर के पास ब्लड टेस्ट के लिए गई थी

मैंने वहां देखा कि एक आदमी वहां आया हुआ था अपनी माँ और अपनी पत्नि के साथ

शायद उसकी नई शादी थी या

मुझे ठीक से मालूम नहीं हुआ

उसकी माँ विधवा और बूढ़ी एक तरफ बैठी उनके हाथ मे एक बैग था और वो कुर्सी मे बैठी थी

उनको खांसी भी आ रहीं थीं

बेटा और बहू अपनी बात चीत मे मस्त थी और माँ बार बार पानी निकाल निकाल कर पी रहीं थीं

वो दोनों बात कर रहे थे और मैं भी उन सबको देख रहीं थीं

लेकिन मेरी दृष्टि माँ पर अधिक थी क्योंकि मैं भी इस दुनिया को देख रहीं थीं

मैं सोंच रहीं थीं कि इन्होंने कितनी मुश्किल से अपने बेटे को पालन पोषण करके बड़ा किया होगा और बेटा तो इनको ध्यान ही नहीं दे रहा सिर्फ अपनी पत्नी मे ही व्यस्त हो गया

इतने मे पत्नी ने उससे कुछ कहा तो उस आदमी ने अपनी पत्नि को अपनी गोद मे लिया लिया और उसके बालों मे उंगलिया फ़ेर रहा है और उसकी पत्नि उसकी गोद मे सो गई थी

माँ एक तरफ दीवार का सहारा लेकर अपने सिर को उसमे टिकाये हुए थी

मुझे बहुत दुख हो रहा था

लेकिन मेरी समझ मे नहीं आ रहा था कि मैं भी तो कभी इनकी उम्र मे थी लेकिन कभी ऐसा तो हम लोगों ने नहीं किया

मैं हमेशा अपनी सासु मां के साथ सभ्यता के साथ रही

क्या आजकल के बेटे ऐसे ही हो गए

मुझे समझ में आ गया कि बेटे की जिंदगी दूसरी हो जाती है जब उसकी शादी हो जाती है

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