
चलते जाते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं
बहुत आशाएं करते हैं
बहुत फिक्र करते हैं अपनों की
कई अनजान लोगों से मुलाकात होती है
कुछ अपने बन जाते हैं
कुछ अपने होकर भी गुमनाम रास्ते पर निकल जाते हैं
और कुछ एकदम खो ही जाते हैं
किस तरह के रास्ते है
लगता है कि ये जाने पहचाने है
और कभी कभी लगता है कि हम यहां पहले भी आ चुके हैं
अब आगे क्या होने वाला है
कौन सा वक्त आने वाला है
रातें होती जा रहीं है
सुबह से मुलाकातें होती है
पर ना जाने कब ये सुबह भी खो जाएगी
और हम गुमनामी के रास्ते पर चले जाएंगे
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