माँ बाप के बनाए हुए घर मे रहते हैं उन्हीं की बसाई गृहस्थी को बहुएं इस्तेमाल करती है उन्हीं पर रौब जमाती है और उन्हीं का तिरस्कार करती है ये तो दुनिया है
माँ बाप के बनाए हुए घर मे रहते हैं उन्हीं की बसाई गृहस्थी को बहुएं इस्तेमाल करती है उन्हीं पर रौब जमाती है और उन्हीं का तिरस्कार करती है ये तो दुनिया है
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