
सुरुचि अपनी पुरानी यादों मे खो जाती है और सोचती है कि उसी कमरे को देखना चाहिए जिसमें उसके अच्छे दिन गुजरे थे भले ही कुछ दिन के लिए
लेकिन वह सोचती है कि आज किस्मत फिर से उसे उसी मोड़ पर ले आई जहां से वो गई थी
उसने किस प्रकार से अपनी जान बचाई थी
वो सोंचने लगी कि कोई व्यक्ती इतनी जल्दी कैसे बदल जाता है जैसे वह बदल गए थी
और उसके कदम उसी पुरानी टूटी हुई हवेली की ओर बढ़ने लगते हैं तभी
अचानक उसका ध्यान दीवार की तरफ जाता है वह याद करती हैं कि वह इस दीवार को फांद कर किस प्रकार बाहर निकली थी
उसे अंदर जाने की ललक थी वह फिर से उन दिनों की बीती हुई यादों को फिर से याद करना चाहती थी क्रमशः
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