अधीर

वो अधीर हो चुका था उसकी एक झलक पाने के लिए

खड़ा था उस मोड़ पर जहां से वह निकलती थी

लेकिन वह किसके लिए अधीर था

कुछ समझ नहीं पा रहा था

किसके लिए बैचैन था

उसके लिए बैचैन था जिसकी एक झलक एक चर्च के पास मिली थी

वो कौन थी

वो कहा से आई थी

क्या वो उसे जानती थी

कुछ पता नहीं

मालूम नहीं किसी किसी का मन किसी के लिए अधीर क्यों होता है

कौन पागल कर देता है किसी को

किसी की वासना

किसी की तृष्णा

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