
जिसकी नाव ठीक से तैर कर आगे की ओर बढ़ती है उसके पास कई लोग रहते हैं अपने बन जाते हैं
लेकिन जिसके जीवन की नाव गोते खाती है या मझधार मे अटक जाती है उसे लोग छोडकर चले जाते हैं चाहे वो कितने ही अपने हों

जिसकी नाव ठीक से तैर कर आगे की ओर बढ़ती है उसके पास कई लोग रहते हैं अपने बन जाते हैं
लेकिन जिसके जीवन की नाव गोते खाती है या मझधार मे अटक जाती है उसे लोग छोडकर चले जाते हैं चाहे वो कितने ही अपने हों
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