
दीपेन्द्र और वह लड़की वहाँ से जाने लगते हैं और बाहर उस बूढे आदमी के साथ निकल आते हैं
दीपेन्द्र उस लड़की को छोडकर जाने लगता है तभी लड़की कहती हैं कि मेरे घर चलो अभी तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तुमने कुछ खाया भी नहीं है
तुम थके हुए हो कल चले जाना
मैं तुम्हें नहीं रुकेंगी
दीपेन्द्र उसकी बात मान लेता है और उस लड़की के साथ उसके घर निकल चलता है
रात हो जाती है
लड़की के घर मे थोड़ा सा आटा मिलता है
लड़की चूल्हा जलाकर रोटी पकाती है और दीपेन्द्र को दे देती है रोटी एक होती है वो भी खूब मोटी मोटी और उसमे थोड़ा सा नमक होता है
दीपेन्द्र रोटी खाने बैठता है तो देखता है कि लड़की के पास रोटी नहीं है दीपेन्द्र रोटी रख देता है और कहता है कि तुम्हारा खाना कहां है
लड़की कहती हैं कि अभी आटा रखा है मैं अभी और रोटी बना लुंगी
दीपेन्द्र भी वह रोटी रख देता है और कहता है कि जब तुम अपनी रोटी बनाना तब एक साथ मैं भी खाएगा इस तरह खाना अच्छा नहीं लगता है
क्रमशः
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