पिता ईश्वर का दूसरा नाम है

पिता ही वह भगवान है, जिसके साक्षात दर्शन हम कर पाते हैं।
फिर भी, हम समझ नहीं पाते हैं।
भले उनके विचार पुराने हो सकते हैं। लेकिन जीवन का अनुभव हमसे ज़्यादा है।
सुखमय जीवन जीना है तो, पिता का सम्मान करें, कभी भी न उनका अपमान करें।
रोज़ मेहनत करते हुए, बुढ़ापा हो आता है।
जीवन भी वो अपना जी नहीं पाते, जिम्मेदारियों में दबकर, उनका मन रह जाता है।
विचारों का मतभेद होने पर, सम्मान देते हुए ही बात करें।
मनुष्य गलतियों का पुतला है, इसलिए, पिता भी गलत हो सकता है, फिर भी, दायरे में रहकर ही बात करें। पिता ही वह भगवान ……

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