विधि का विधान कोई भी नहीं टाल सकता

विधि का विधान बनाया गया है जो होना होता है वह होकर ही रहता है लेकिन जब तक वश चले तब तक सावधानी रखें
एक घटना
याद आई
मैंने एक बाग मे टहल रही थी
जो आम का था
उसमे मैंने देखा कि
एक तोता बैठा हुआ था जो बूढ़ा सा था
एक दीवार पर
उसके पंख झड़ गए थे
चोंच का रंग भी अजीब सा हो गया था
उसका रंग उड़ा हुआ था
वो अकेला सा बैठा अपनी जान बचा कर बैठा
कुछ पेड़ों के बीज़ और कच्चे फल खा रहा था
मैं 14 साल की थी
मैं उसकी मदद करना चाहती थी मैं उसे अपने घर ले जाने के लिए सोंच रही थी
लेकिन मैं डर भी रही थी कि अगर मैं उसे पकड़ेंगे तो वह डर जाएगा और कहीं इधर उधर कूद जाएगा
लेकिन मैंने ठान लिया कि मैं अब इसको अपने घर ले जाऊँगी
और मैं उसे अपने घर ले जाने के लिए आगे बढ़ी और उसपर अपना दुपट्टा डालने वाली थी क्योंकि वह काट रहा था उससे भी मैं डरती थी
ज्योंही मैं आगे बढ़ी मैं उसे पकड़ लेती मगर एक चील
वही कहीं से जाने कहां से आ गई और उसपर झपट पड़ी और उसे चोंच मे दबा कर उड़ चली
मैं बेबस की तरह उसे देखती रही और सोंचने लगी कि शायद मेरी ही कुछ गलती थी
मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की और वह थोड़ा सा उड़ा और चील की नजर मे आ गया और चील उसे लेकर चली गई और उसका भोजन वह तोता बन चुका था
लेकिन मित्रों यह विधि का विधान है
उस तोते को किसी का भोजन ही बनना था
मैंने तो अच्छा ही सोंचा था कि मैं उसे अपने घर ले जाऊँगी और उसे सुरक्षित करूंगी उसे खाना दूंगी
दवा lagaungi
लेकिन जो विधि का विधान है उसे कोई बदल नहीं सकता ना मैं
और ना कोई और
😒😒
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