हमारी सोंच मे फर्क़ होता है जो हम किसी भी वस्तु को नकारात्मक तरीके से देखते हैं
कुछ नकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर मे व्याप्त हो जाती है
कुछ हमारे ही विचार दूसरी ओर चलें जाते हैं हम अपने बारे मे कम दूसरों के बारे मे अधिक सोंचने लगते हैं
दूसरों से बदला लेने की प्रवृत्ति हमारे लिए घातक हो सकती है
सबसे बड़ी बात यह है कि हम अवसाद का शिकार हो जाते हैं
जो हमारे लिए हितकारी नहीं होता है
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