
जब याद आता है तब सुरुचि अपने हाथों से अपना मुहँ ढक कर रोने लगती है लेकिन अब वह अपने आंसुओ को पोंछ लेती है और बढ़ चलती है उस जगह पर जहां पर उसकी यादें जुड़ी हुई हैं बरसों पुरानी
अब वह अपना सारा सामान उसी स्थान पर रख देती है
अब वो कुछ भी देखना नहीं चाहती
शिव जी के मंदिर के पास जाती है और वहां पर लगे उस आंवले के पेंड को देखती है
उसमे कितने सारे आंवले लगे थे वह पेंड बहुत बड़ा हो गया था लेकिन बिल्कुल वीरान सा हो गया था उसके पास सिर्फ पंछी थे
और आंवले जमीन मे बिखरे हुए थे और कुछ लगे हुए थे आंवले पक चुके थे
तभी उसका तोता उसके पास आ गया था उसके पास बैठा हुआ था
कुछ कहना चाहता था अपना सिर हिला रहा था
ये वही तोता था जिसे बहुत साल पहले सुरुचि बचा कर लाई थी
सुरुचि उसे देखकर हंसने लगी तोता भी हंस रहा था
क्रमशः
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