जो प्रेम करते हैं और हमारा ध्यान रखते हैं
हम रूठ जाते हैं तो वो हमे मनाते है
हमारे पास अपमान सह कर भी हमारे पास आते हैं
जो सिर्फ हमारी भलाई की चाह रखते हैं
हमारी भलाई के लिए हमारे ही बुरे बन जाते हैं
सोंचे आप की
अगर वो लोग हमसे दूर हो जाते हैं तो
उनकी तरह हमे कोई दूबारा नहीं मिलता
कितने लोग मिलते हैं लेकिन कोई उनके जैसा नहीं मिलता
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