सुबह हुई लेकिन

नई सुबह हुई

रात का एक सुन्दर सपना था

वहां पर हर कोई अपना था

आलीशान घर था

एक गाड़ी भी थी

एक सुन्दर सी घरवाली भी थी

जो आई थी हवेली देखकर

मर मिटी थी उस पर

जान देने को तैयार

उसकी हमसफ़र बनने को व्याकुल

कुछ भी कर गुजरने वाली

उसकी सपनो की घरवाली

सपनों की दुनिया में प्यार ही प्यार यथार्थ की दीवार ना थी

बस सपनो का महल था

बस प्यार ही प्यार अच्छे पकवान

मोटे गद्दे पर रातें

मदहोश कर देने वाली वो सपनो भरी रातों

को एक गरीब और बेरोजगार युवक सपने में देख रहा था

तभी सपना टूटा

आंखे खुली

तो उसने देखा आंखे मलकर

वही टूटा हुआ घर और बाहर एक टूटी हुई साईकिल

सुबह हुई लेकिन ये सुबह उसे बता रही थी कि सपना देखना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि कोई सपना ही ना हो सब हकीकत ही हो


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