देव दासी भाग 588

गीता कहती हैं कि तुम्हें सौम्य भैया धोखे से यहां ले आए हैं अभी वीर सिंह को भी पता नहीं है कि तुम यहां रहती हो

चलो अब बहुत हो चुका

अब जाओ और वो बर्तन रखें है जरा धो डालो अब तुम्हारी तबीयत भी ठीक है

कामिनी भाभी के सामने नाटक मत करना

कुछ काम करो जाकर जब से आई हो खाली बैठी हो आराम ही कर रहीं हो

अभी सफाई भी करने को पड़ी है

मुझे तो खाना बनाने जाना हैं

सुरुचि गीता की आँखों में देखती है और काम करने चल देती है

वहां सुरुचि देखती है कि अनया और रोहित खेल रहे थे

और सुरुचि उन दोनों को देख रही थी

वो दोनों सुरुचि के पास आते हैं और सुरुचि का मुहँ देखते हैं

अनया कहता है कि ताई कहु या चाची कहूँ

बुआ कहेंगे तो गीता बुआ मारेगी हमे

सुरुचि कहती हैं कि जाकर अपनी माँ से पूछो की तुम लोग मुझे क्या कहोगे

अब दोनों भागते हुए कामिनी के पास जाते हैं और कामिनी से कहते हैं कि माँ

वो जो काम कर रही हैं उन्हें हम क्या कहेंगे

कामिनी कहती हैं कि कौन

तो दोनों सुरुचि के पास हाथ पकड़ कर ले जाते हैं

सुरुचि को बर्तन धोते देखकर कामिनी चिल्ला कर कहती हैं कि इसे अभी काम करने को किसने कहा

सुरुचि धीरे से कहती है कि मैं खुद काम करने आई M

किसी ने नहीं कहा मेरा मन नहीं लगता था T

और मैं बर्तन धोने बैठ गई

मेरी तबीयत ठीक है

कामिनी ने कहा कि मुझे खुशी हुई कि तुम कुछ बोली तो

क्रमशः

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