
गीता कहती हैं कि तुम्हें सौम्य भैया धोखे से यहां ले आए हैं अभी वीर सिंह को भी पता नहीं है कि तुम यहां रहती हो
चलो अब बहुत हो चुका
अब जाओ और वो बर्तन रखें है जरा धो डालो अब तुम्हारी तबीयत भी ठीक है
कामिनी भाभी के सामने नाटक मत करना
कुछ काम करो जाकर जब से आई हो खाली बैठी हो आराम ही कर रहीं हो
अभी सफाई भी करने को पड़ी है
मुझे तो खाना बनाने जाना हैं
सुरुचि गीता की आँखों में देखती है और काम करने चल देती है
वहां सुरुचि देखती है कि अनया और रोहित खेल रहे थे
और सुरुचि उन दोनों को देख रही थी
वो दोनों सुरुचि के पास आते हैं और सुरुचि का मुहँ देखते हैं
अनया कहता है कि ताई कहु या चाची कहूँ
बुआ कहेंगे तो गीता बुआ मारेगी हमे
सुरुचि कहती हैं कि जाकर अपनी माँ से पूछो की तुम लोग मुझे क्या कहोगे
अब दोनों भागते हुए कामिनी के पास जाते हैं और कामिनी से कहते हैं कि माँ
वो जो काम कर रही हैं उन्हें हम क्या कहेंगे
कामिनी कहती हैं कि कौन
तो दोनों सुरुचि के पास हाथ पकड़ कर ले जाते हैं
सुरुचि को बर्तन धोते देखकर कामिनी चिल्ला कर कहती हैं कि इसे अभी काम करने को किसने कहा
सुरुचि धीरे से कहती है कि मैं खुद काम करने आई M
किसी ने नहीं कहा मेरा मन नहीं लगता था T
और मैं बर्तन धोने बैठ गई
मेरी तबीयत ठीक है
कामिनी ने कहा कि मुझे खुशी हुई कि तुम कुछ बोली तो
क्रमशः
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