हम किस तरह की सोंच रखते हैं

हम सबकी बीमारी अधिक सोंचने से उत्पन्न होती है

अगर हम कुछ अच्छा सोंचते है और अपने बीते हुए सुखद पलों को याद करते हैं तो हमारे शरीर और मन मे एक स्फूर्ति का अनुभव होता है हम खुश रहते हैं और हमे खूब नींद आती है और कभी कभी हम कुछ अच्छा खाने की सोंचते है और अच्छे कपड़े भी पहनते हैं

अच्छी यादों को जब भी हम ताजा करते हैं तो हम कहीं सैर-सपाटा पर निकल जाते हैं

कुछ लोग इतने खुश होते हैं और लंबी ड्राइव पर निकल जाते हैं

अगर हम खुश रहते हैं तो हम अपनी समस्याओं का समाधान भी आसानी से खोज लेते हैं

अगर हम खुश रहते हैं तो उसी प्रकार के लोग भी हमे मिलते हैं और हम उनके साथ खुश रहते हैं

कभी कभी हम खुश रहते हैं तो गाना गाने लगते हैं हमे नहीं आता है लेकिन हम फिर भी गाने लगते हैं

हम नाचने भी लगते हैं

अच्छे अच्छे वीडियो देखते हुए मस्त रहते हैं

मित्रों जीवन अधिक लंबा नहीं होता है कुछ हलचलें तो आती ही रहती है लेकिन हलचलों के बाद भी हमे स्थिरता भी मिलती है

जैसे भी हो खुश रहा करो

किसी वस्तु के लिए इतने अधीर भी मत बनो जिसमें आपकी शांति ही चली जाए

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