आज कुछ विशेष लिखूँगी अपने बारे में

कोई बात कुछ अपनी होती है ऐसी जो कोई किसी से कह नहीं सकता

कभी कभी या अक्सर ऐसा होता है कि जो हम चाहते हैं उसके अनुरूप ही हमारे जीवन में कुछ चीजों या सदस्यों या फिर आप कह लीजिए कि कुछ ऐसे लोगों का समावेश होता है जो हम नहीं चाहते हैं

उन लोगो से जूझना निपटना कभी कभी अपने वश मे नहीं होता है

लेकिन हम अपनी हिम्मत के बल पर उन लोगों से या उन वस्तुओं से अपना संतुलन बना लेते हैं

जाहिर तौर पर यह कहा जा सकता है कि हमे उन्हें बदलने की जगह खुद को बदलना पड़ता है जो हम बिलकुल भी नहीं चाहते हैं

क्योंकि अगर हम स्वयं को नहीं बदलने की कोशिश नहीं करते तो वही वस्तुएं और वही लोग हमारे दर्द का कारण बन जाते हैं

मुझे आभास भी नहीं था कि मेरे जीवन मे एक कम बुद्धि का

या जो बच्चा अपरिपक्व है मेरे जीवन मे प्रवेश करेगा

लेकिन वह आया तो

मेरे जीवन में बहुत सी हलचलें उत्पन्न हुई

लोगों ने मुझे अपमानित किया

मुझे बहुत ही सम्भल कर और दब कर सबसे रहना पड़ा

क्योंकि सबसे बड़ी कमजोरी मेरा बच्चा था

वह गलतियां करता था और लोग मुझे ताना देते

कभी कभी अक्सर लोग मुझे गालियाँ भी देने लगते

कभी कभी अक्सर

रोज ही ऐसा होता कि मैं उसे सम्भालने मे लग जाती और ससुराल के सदस्यों के काम में अगर देर हो जाती तो वो लोग मुझे अक़्सर प्रताड़ित करते थे

उन्हें भी एक बहाना मिल जाता था मुझे कुछ कहने का और मैं अपने साड़ी के आँचल से अपने आंसू पोंछ लिया करती

मायके जाती तो वहां भी लोगों के कठोर बर्ताव को झेलती

कोलकाता के फ्लैट मे आई तो वहां भी पड़ोसियो के कटु शब्दों का प्रहार मैंने झेला

पति द्वारा किए गए अपमान को भी मैंने झेला

मैं अक्सर दबाव मे ही बनी रहती

आत्मनिर्भर बनने की सोचती कुछ करने की कोशिश करती तो यही बेटा बाधा उत्पन्न करता

अब मैं करूं तो क्या करूं मुझे लगता था कि मेरे जीवन मे अब खुशियां ही नहीं आएगी

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