देवदासी भाग 590

कामिनी कहती हैं कि हां तुम ठीक कहती हो उन्हें पीछे के दरवाजे पर आने के लिए कहो रात हो चुकी है घर पर कोई नहीं है वीर सिंह और सौम्य भी नहीं है

गीता उन लोगों से कहती है कि क्या बात है

तो वो लोग कहते हैं कि दरवाजा खोल

मुझे वो महिला तुम्हारे पास है उसे बाहर निकाल दो हम चले जाएंगे

गीता कहती हैं कि कौन सी महिला

वो लोग कहते हैं कि वो जो कुछ दिन पहले तुम्हारे घर आई है वो वही रह रही है वह बहुत ही अपशकुन महिला है

वो तुम्हारे घर का सर्वनाश कर देगी

निकालो उसे वर्ना हम जबरन उसे यहा से ले होंगे

तभी सुरुचि वहां से सब सुन लेती है और वो पीछे की ओर पलट जाती है

वो समझ चुकी है कि ये लोग कौन है और यहा क्यों आए हैं

वो वहां से निकल कर भागती है

वही पुरानी हवेली पर

और अंधेरे में भागती हुई सहसा उसी शिव जी के मंदिर के पास जा पहुंचती है और शिव जी को प्रणाम करते हुए उसी दीवार की ओर चढ़ जाती है जहां से वह पहले भाग निकली थी

क्रमशः

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