कितना मुश्किल होता था वहां रहना

जब पापा रात में दारू पीकर गाली देना शुरू करते थे और घर में बहुत आर्थिक तंगी होती थी

दूसरों को खाते और पहनते देखकर हम ललचाया करते थे

पढ़ाई में मन नहीं लगता था

उफ्फ्फ आज भी मैं जब अपनी मम्मी के रोने को याद करती हूं

मार खाती थी

टूटी हुई चूड़ियाँ और उनके फटे हुए कपडों को याद करके दिल दहल जाता था

छोटे छोटे भाई बहन जोर जोर से रोते थे

और मैं बेबस होकर सब कुछ एक कोने मे खड़ी भूखी प्यासी सब देखती

और बाद मे अपना खाना अपने भाई बहनों को देकर खुद भूखी सो जाती

रात भर मुझे नींद नहीं आती थी

और अगर नींद आती भी थी तो रात में पापा को मम्मी का हाथ पकड़ कर जोर से खिंचकर अपने कमरे में ले जाना मुझे विचलित कर देता था

कभी कभी मैं चिल्ला उठती थी कि मम्मी को मत ले जाओ तो पापा मुझे धक्का देकर जोर से दूर फेंक देते और मम्मी को ले जाते

मैंने ऐसा कौन सा पाप किया था मित्रों जो बचपन मे ये दिन देखने पड़ें मुझे

जिन्हें याद करते हुए आज भी आखों में आंसू आ जाते हैं

Good evening friends

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