जिस जीवन में संघर्ष नहीं होगा उस जीवन में सुख-समृद्धि एवं शांति रुपी मधुर फलों की प्राप्ति भी नहीं हो सकती। संघर्ष वो वृक्ष है जिसकी जडें कड़वी जरूर होती हैं लेकिन उसके फल बड़े ही मधुर होते हैं। जिस जीवन में आज जितनी मधुरता है उस जीवन में कभी उतना ही संघर्ष भी रहा होगा। प्रायः हम लोग मधुर फल तो चाहते हैं लेकिन संघर्ष रूपी कड़वाहट का स्वाद नहीं लेना चाहते हैं।
हम ये भूल जाते हैं कि जीवन की मधुरता की जड़ तो संघर्ष ही है। जो इस कड़वाहट से बचने का प्रयास करते हैं वो जीवन की मधुरता से भी वंचित रह जाते हैं। जिसके जीवन का संघर्ष जितना बड़ा होगा उसके जीवन में उतनी सुख और सफलता की मिठास होगी। पहले संघर्ष की कड़वाहट और फिर सफलता की मिठास, यही तो जीवन का नियम है।
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