देव दासी भाग 591

सुरुचि अब वहाँ से भाग जाती है लेकिन उसे बार बार अपनी बेटी की याद आ जाती है और वो एक स्थान पर बैठकर रोने लगती है और सोचती है कि वह अपनी बेटी के पास कैसे जाए

उधर मंजूलता को डाकू ले जा रहे थे मंदिर के पास

वो लोग मंदिर के पास पहुंच चुके हैं और कहते हैं कि तुम मुझे ख़ज़ाने का पता बताओ वर्ना तुम्हारे माँ बाप को मार डालेंगे

एक डाकू कहता है कि कोई चालाकियां करने की कोशिश मत करना वर्ना अच्छा नहीं होगा

मंजूलता चुप है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा

एक तरफ उसके माता पिता की जान

और दूसरी तरफ मंदिर का ख़ज़ाना

अब वह चुप है

लेकिन वह डाकुओं कहती हैं कि तुम लोग इस रास्ते से आ जाओ

इधर रास्ता है

यहां से खजाने का रास्ता जाता है

और एक बहुत बड़े से कमरे की ओर इशारा करती है और कहती है कि चुपचाप इस कमरे में चले जाओ और खजाना ले लो शोर मत करो

क्रमशः

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