रुकी हुई जिंदगी

दबी दबी सी आवाज ,दबी दबी सी बात ,कैसे बयान करूं अपने दिल का हर हाल

  • सोचती हूं की कहीं दूर चली जाऊं न कोई मुझे देखे न मैं किसी को देख पाऊं ,पेड़ों को देखूं काली घटाओं को देखूं ,अपने आप से कई मुलाकातें करूं ,देखती नहीं मैं कभी ऊंचे सपने ,इच्छाओं को तो मार ही दिया मैने ,जरूरतें भी ज्यादा नहीं इतनी है की पूरी होती रहेंगी ,जीवन के अब कोई हलचल नही ,सब कुछ स्थिर है

उम्मीदों का सिलसिला भी अब टूट गया है। बाहर का जहां अब मुझसे छूट गया है नहीं अब कोई है सिरदर्द मेरा। जो मेरा था वही अब मुझसे रूठ गया है

मुश्किलों की अब परवाह नही। कोई मुझे अब प्यास नहीं। जीनी है अब मुझे जिंदगी। जीने का सामान तो अब मुझे मिल ही गया है

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