आहत

आहत तो सभी होते हैं कभी किसी को देखने की तमन्ना होती है पर पूरी नहीं हो पाती। गौर करते रहते हैं किसी की याद पर ,पर मिलने की घड़ी कमजोर होती है,किसी के साथ जीवन बिताऊं,पर वो तमन्ना भी अधूरी रह जाती है। किसी की झूठी तसल्ली पर सपनों की दुनिया कभी कभी वीरान हो जाती है

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें