तड़प

किसी को किसी न किसी चीज को पाने की तड़प होती है वो चीज तो उसको मिल जाती है क्योंकि तड़प में एक सम्मोहन होता है ,जिस चीज की तड़प होती है वैसे ही रास्ता बन जाता है ,और उस वस्तु को इंसान पा ही जाता है ,किसी को अपने प्रेयसी के लिए तड़प है,किसी को प्रेमी के लिए ,किसी को मां बाप को देखने की तड़प है किसी को पैसे की तड़प ,किसी न किसी वस्तु की तड़प हर इंसान को है ,किसी को मां सम्मान पाने की तड़प ,किसी को उन्नति का शिखर छूने की तड़प ,इंसान का जीवन तड़पते ही बीत जाता है ,तड़प तड़प के पूरा जीवन स्वाहा हो जाता है

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