मैं सबकी लाडली बहु थी ,जिद करती थी ,मेरे ससुर पिता से भी ज्यादा मुझे प्यार करते थे ,मेरी जिद वो पूरी करते थे ,मैं कुछ भी खाने को मांगती वो कहीं से भी लेकर मुझे देते थे ,मेरी सासू मां भी मुझे हर समय मुझे देखती रहती ,मुझे छोड़ कर कही नहीं जाती ,कभी कभी मुझे डॉट भी दिया करती थी ,जब मैं गुस्सा हो जाती तो सब मुझे मनाते और खाना खिलाते ,मेरे छोटे छोटे बच्चे थे,उनके साथ सब खेलते ,हंसते ,सारे दिन बच्चो को देखते ,मेरी चाची सास भी मुझे बहुत प्यार करती ,थोड़ी सी भी चीज होती थी तो वो मुझे जरूर देती, मैं आज क्या बनाऊं ये समस्या सब सॉल्व कर देते ,आज सुबह ये बनाओ ,रात में खाने में ये बनाओ,इस दिन ये बनाओ उस दिन वो बनाओ,बहुत अच्छा लगता था उन लोगो का साथ ,सब एक एक दिन बिछड़ते चले गए, छूटते चले गए ,एक एक त्योहार में सबकी बहुत याद आती ,मेरे बनाए हुए मालपुए,और भी चीजे सब खूब तारीफ कर कर के गरम गरम खाते ,और मैं सबके पैर छू कर उनका आशीर्वाद लेती ,मेरी गलतियों को वो लोग बहुत आसानी से माफ कर देते ,आज उनकी याद जब भी आती है तो आंसू छलक जाते है ,उनकी सेवा करके मुझे बहुत आनंद मिलता ,उनके पास कोई कीमती चीज या कोई जायदाद नहीं थी ,लेकिन उनका मन बहुत पवित्र था ,मैं तीन बहुओं में सबसे छोटी थी ,मैं अपने ससुर का आम खा जाती थी ,वो कहते पहले बता देती तो तेरे लिए भी ला देता ,मैं कहती बाबू जो आप आम खाते हो पाता नहीं उसमे बहुत स्वाद होता है,आज मैं आम केवल एक टुकड़ा ही खाती हूं ,बच्चो के लिए तो सब बनाती हूं पर तारीफ करके कोई नहीं खाता ,उफ्फ कितने एहसासों से भरे थे वो दिन

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