
जब भी मैं अपने आसपास देखती हूं तो मुझे सब उलझे हुए दिखते है ,सब चिंताग्रस्त ,किसी में कोई प्रसन्नता ही नहीं सब बहुत ज्यादा पाने की होड़ में लगे हुए है ,थोड़े में किसी को शांति ही नहीं ,
कोइ अपने परिवार के लिए बहुत चिंतित है ,
कोई अपनी बीमारी को लेकर परेशान है ,किसी के माता पिता लटके हुए है ,स्वर्ग नहीं सिधार रहे हैं ,बिचारे सेवा करते करते आधे हुए जा रहे
किसी को अपनी बेटी की शादी की चिंता है
कोई नौकरी के लिए भाग रहा है ,छोटी नौकरी भी नहीं चाहिए ,काम कम और पैसा ज्यादा मिले
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