दहेज से लड़ाई

दहेज एक अभिशाप की तरह अभी भी अपने पैर पसारे हुए है आज भी लोग पढ़ी लिखी ,लड़की को भी दहेज देकर शादी करतें है ,धनिया पढ़ी लिखी थी ,उसने रोज रोज के अत्याचारों से तंग आकर घर से निकल जाने का फैसला किया ,उसको ससुराल में क्या मिलता था एक तो घर का सारा काम करती थी ऊपर से पति की बातें और सास ननद की जली कटी बात ,और रात में पति की मार खानी पड़ती थी ,उसका कोई कुसूर नहीं था ,उसकी दोनो नन्नदें पति के कान भर देती थी की भाई उसके घर से इतना पैसा समान मिला था ,उसकी बहु बहुत सुंदर है,बस पति का मूड खराब और रात में लड़ाई झगड़ा शुरू कर देता था ,अभी धनिया जवान थी ,सुंदर थी अपने पैरों खड़ी हो सकती थी ,एक दिन दोपहर में जब सब अपने कमरे में थे ,उसने पार्टी ऑफिस में जाकर पार्टी के लोगो से मदद मांगी ,और कहा आप लोग मुझे यहां से जाने में मेरी मदद करिए ,मैं यहां नहीं रहूंगी अब ,मेरे पास पैसे नहीं है आप फोन करवाकर मेरे पिताजी को सूचित कर दीजिए ये मेरा नंबर लगा दीजिए , उन लोगो ने धनिया की मदद की और अपने पिताजी को फोन करके धनिया अपने पिताजी को बुलाकर अपने घर जाने लगी तो उसके पति ने कहा की ले जाना हो तो हमेशा के लिए चली जाना ,धनिया ने कहा अच्छा एक मिन रुको हमे तो अब हमेशा के लिए ही जाना है अब कुछ रह ही कहां गया ,और जाकर पार्टी ऑफिस के लोगो को बुला लाई और अपने शरीर के नीले निशान दिखाए ,पार्टी ऑफिस के आदमी पुलिस को ले आए और तब जम कर बवाल हुआ , एफआईआर लिखाई गई ,पुलिस ने उन लोगो को एक चुनौती दी अगर अबकी बार बहु को किसी ने भी प्रताड़ित किया तो वो सीधे जेल जाएगा ,धनिया अपने पिताजी के साथ मैके चली गई , और वहां पर छोटे छोटे बच्चों को पढ़ाने लगी एक स्कूल मेभी उसने पढ़ाना शुरू कर दिया ,जब पड़ोसी ,रिश्तेदार ससुराल वालों को ठुकने लगे तब सब धनिया को वापस ले आए और धनिया उन लोगो के साथ आराम से रहने लगी ,सब ठीक हो गए ,अत्याचार ही बढ़ावा देता है अत्याचार को इसलिए अत्याचार के विरोध में आवाज उठाएं कहानी समाप्त

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