तपिश

तपिश की वो दोपहर जब कोई थोड़ा सा आराम चाहता है,वो गर्मी की दोपहरी ,जब कोई थोड़ी से राहत चाहता है ,तपती हुई सूर्य की किरणे उसके रोम रोम में गर्मी पैदा कर देती है ,फिर भी पेट की भूख की आग उसे काम करने को बाध्य करती हैं ,उसके छोटे छोटे बच्चे भूख से न तड़पें उसके परिवार का मोह उसे तपती धूप काम करने के लिए उसे अपनी ओर आकर्षित कर लेता है ,गरम और प्रचंड आग्नि जेसी धूप मानो कह रही है की तप कर ही लोहा मजबूत होता है और कड़ी से कड़ी वस्तु को काट सकता है आज की ये कड़ी मेहनत ही उसे आगे एक अच्छे समय की और ले जाएगी

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